Category of Bare Act Name of the Act Year of Promulgation
Criminal Laws Indian Penal Code 1860
Act Number Enactment Date Chapter Number
45 06.10.1860 16
Chapter Title Sub-Chapter Legislated by
Of Offence Affecting The Human Body - Parliament of India

1(1) Whoever, for the purpose of exploitation, (a) recruits, (b) transports,

  1. harbours, (d) transfers, or (e) receives, a person or persons, by—

First.—using threats, or 

Secondly.—using force, or any other form of coercion, or

Thirdly.—by abduction, or

Fourthly.—by practising fraud, or deception, or

Fifthly.—by abuse of power, or

Sixthly.— by inducement, including the giving or receiving of payments or benefits, in order to achieve the consent of any person having control overthe person recruited, transported, harboured, transferred or received,

commits the offence of trafficking

(2) Whoever commits the offence of trafficking shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than seven years, but which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

(3) Where the offence involves the trafficking of more than one person, it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than ten years but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.

(4) Where the offence involves the trafficking of a minor, it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than ten years, but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.

(5) Where the offence involves the trafficking of more than one minor, it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than fourteen years, but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.

(6) If a person is convicted of the offence of trafficking of minor on more than one occasion, then such person shall be punished with imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that persons natural life, and shall also be liable to fine.

(7) When a public servant or a police officer is involved in the trafficking of any person then, such public servant or police officer shall be punished with imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that persons natural life, and shall also be liable to fine.

_______________________

1. Subs. by Act 13 of 2013, s. 8, for section 370 (w.e.f. 3-2-2013).

Offence Description Punishment provided Cognizable/Non-Cognizable

Trafficking of person

Trafficking of more than one person.

Trafficking of a minor

Trafficking of more than one minor

Person convicted of offence of trafficking of minor on more than one occasion.

Public servant or a police officer involved in trafficking of minor

Imprisonment of not less than 7 years but which may extend to 10 years and with fine

Imprisonment of not less than 10 years but which may extend to imprisonment for life and with fine.

Imprisonment of not less than 10 years but which may extend to imprisonment for life and with fine.

Imprisonment of not less than 14 years but which may extend to imprisonment for life and with fine.

Imprisonment for life which shall mean the remainder of that persons natural life and with fine.

Imprisonment for life which shall mean the remainder of that persons natural life and with fine

Cognizable

Ditto

Ditto

Ditto

Ditto

Ditto

Bailable/Non-Bailable Trial Court Details Compoundable/Non-Compoundable

Non-Bailable

Ditto

Ditto

Ditto

Ditto

Ditto

Court of Session

Ditto

Ditto

Ditto

Ditto

Ditto

Non-Compoundable
Compoundable by Whom Concerned Ministry Concerned Department
Non-Compoundable Ministry of Home Affairs Department of Internal Security

धारा 370 आईपीसी- मानव तस्करी - दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना या बेचना। , IPC Section 370

भारतीय दंड संहिता की धारा 370 के अनुसार, जो भी कोई, धमकियों का या बल का या किसी अन्य प्रकार के दबाव का उपयोग कर, या अपहरण करके, या धोखाधड़ी, या धोखा करके, या शक्ति का दुरुपयोग करके, या प्रलोभन द्वारा, भुगतान या लाभ देने या प्राप्त करने सहित, शोषण के उद्देश्य से भर्ती, परिवहित, आश्रयीत, स्थानांतरित या प्राप्त व्यक्ति / व्यक्तियों पर नियंत्रण रखने वाले किसी भी व्यक्ति की सहमति हासिल करने के लिए, किसी व्यक्ति या व्यक्तियों का, भर्ती करना, ढोना, शरण देना, स्थानान्तरण, या प्राप्त करना कारित करता है, वह तस्करी के अपराध का काम करता है।
जो भी कोई तस्करी के अपराध का काम करता है, तो उसे कम से कम सात वर्ष का कठोर कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।
जो भी कोई एक से अधिक व्यक्ति की तस्करी के अपराध का काम करता है, तो उसे कम से कम दस वर्ष का कठोर कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

  जो भी कोई एक नाबालिग की तस्करी के अपराध का काम करता है, तो उसे कम से कम दस वर्ष का कठोर कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

  जो भी कोई एक से अधिक नाबालिग की तस्करी के अपराध का काम करता है, तो उसे कम से कम चौदह वर्ष का कठोर कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

  यदि कोई व्यक्ति नाबालिग की तस्करी के अपराध में एक से अधिक बार दोषी करार हुआ है, तो उसे आजीवन कारावास जिसका मतलब है कि उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए या मृत्यु होने तक कारावास की सज़ा से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

  यदि कोई लोक सेवक या पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी में शामिल है, तो ऐसे लोक सेवक या पुलिस अधिकारी को आजीवन कारावास जिसका मतलब है कि उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए या मृत्यु होने तक कारावास की सज़ा से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

  लागू अपराध
1. व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी ।
सजा - सात से दस वर्ष कारावास और आर्थिक दण्ड।
यह एक गैर- जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

2. एक से अधिक व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी ।
सजा - दस वर्ष से आजीवन कारावास और आर्थिक दण्ड।
यह एक गैर- जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

3. नाबालिग व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी ।
सजा - दस वर्ष से आजीवन कारावास और आर्थिक दण्ड।
यह एक गैर- जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है। 

4. एक से अधिक नाबालिग व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी ।
सजा - चौदह वर्ष से आजीवन कारावास और आर्थिक दण्ड।
यह एक गैर- जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

  5. नाबालिग की तस्करी के अपराध में एक से अधिक बार दोषी।
सजा - आजीवन जिसका अर्थ है शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास और आर्थिक दण्ड।
यह एक गैर- जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

6. यदि कोई लोक सेवक या पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी में शामिल है
सजा - आजीवन जिसका अर्थ है शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास और आर्थिक दण्ड।
यह एक गैर- जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

  यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

अपराध सजा संज्ञेय जमानत विचारणीय

व्यक्ति की तस्करी

एक से अधिक व्यक्ति की तस्करी

नाबालिग की तस्करी

एक से अधिक नाबालिगों की तस्करी

एक से अधिक अवसरों पर नाबालिग की तस्करी के अपराध के दोषी व्यक्ति

लोक सेवक या नाबालिग की तस्करी में शामिल एक पुलिस अधिकारी

7 से 10 साल + जुर्माना

जीवन के लिए 10 साल + जुर्माना

जीवन के लिए 10 साल + जुर्माना

जीवन के लिए 14 साल + जुर्माना

प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास + जुर्माना

प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास + जुर्माना

संज्ञेय

संज्ञेय

संज्ञेय

संज्ञेय

संज्ञेय

संज्ञेय

गैर जमानती

गैर जमानती

गैर जमानती

गैर जमानती

गैर जमानती

गैर जमानती

सत्र की अदालत

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